Pehla Girmitiya Giriraj Kishore

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Hardcover

904 pages


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Pehla Girmitiya  by  Giriraj Kishore

Pehla Girmitiya by Giriraj Kishore
| Hardcover | PDF, EPUB, FB2, DjVu, talking book, mp3, RTF | 904 pages | ISBN: | 4.64 Mb

इस बृहद उपनयास के नायक महातमा गाँधी नहीं हैं, मोहनदास हैं - हमारे जैसा एक आदमी, वह भी ‘इकसाला’ गिरमिटिया, लेकिन रोजी-रोटी के लिए दकषिण अफरीका गया था। वह पहला गिरिमिटिया था, जो बैरिसटर भी था और कुली भी। उसने दकषिण अफरीका के दूसरे पाँच-साला गिरिमिटियोंMoreइस बृहद् उपन्यास के नायक महात्मा गाँधी नहीं हैं, मोहनदास हैं - हमारे जैसा एक आदमी, वह भी ‘इकसाला’ गिरमिटिया, लेकिन रोजी-रोटी के लिए दक्षिण अफ्रीका गया था। वह पहला गिरिमिटिया था, जो बैरिस्टर भी था और कुली भी। उसने दक्षिण अफ्रीका के दूसरे पाँच-साला गिरिमिटियों को साथ लेकर उनकी मुक्ति का बिगुल बजाया था, जिसमें हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, पारसी-सब एशियाई शामिल थे।..उपन्यास लिखने के दौरान उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैण्ड, मारीशम की यात्राएं कीं और तथ्यों घटनाओं, स्थलों और पात्रों से अपने को जोड़ा, सामग्री इकट्ठी की, और जो सार मिला उसे प्रामाणिकता के साथ संवेदना और अभिव्यक्ति के धागे में गूँथा। दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए गाँधी जी ने संघर्ष और आत्मदान का एक सपना देखा था,उसी संघर्ष और स्वप्न को गिरिराज किशोर ने अपने उपन्यास का विषय बनाया है। अपने इस उपन्यास में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की गन्ध को बनाये रखा है और उन गिरमिटियों के पसीने की खुशबू को भी नहीं खोने दिया है जिन्होंने तमान यातनाओं के बीच जीवित रहने का संकल्प किया था। कहना न होगा कि मोहनदास कर्मचंद्र गाँधी के अन्तरंग मन और उनकी चेतना को भी इस उपन्यास में पकड़ने की कोशिश की गयी है और गाँधी के अन्तर्विरोधी के बारे में भी उपन्यास पूरी तरह मुखर है।



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